‘राम की शक्तिपूजा’ में निराला का व्यक्तिगत जीवन संघर्ष
Keywords:
राम की शक्तिपूजा, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', व्यक्तिगत जीवन संघर्षAbstract
महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित ''राम की शक्तिपूजा' आधुनिक हिंदी साहित्य की एक युगांतरकारी और कालजयी लंबी कविता है। यद्यपि इसका बाह्य कथानक पौराणिक है और बांग्ला की 'कृतिवास रामायण' पर आधारित है, किंतु इसके आंतरिक धरातल पर कवि का आत्मसंघर्ष, गहन वैयक्तिक वेदना और जीवन की विसंगतियाँ गुंफित हैं। प्रस्तुत शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य यह विश्लेषित करना है कि किस प्रकार कविता के नायक 'राम' का संशय, आर्थिक और सामाजिक विषमताओं से उपजी निराशा, और अंततः शक्ति की मौलिक कल्पना द्वारा विजय प्राप्त करना, वास्तव में निराला के अपने जीवन संघर्ष का 'वस्तुनिष्ठ प्रतिरूप' है। यह शोध यह सिद्ध करता है कि राम का द्वंद्व निराला का अपना द्वंद्व है और राम की विजय रूढ़ियों एवं अभावों पर निराला की साहित्यिक विजय का उद्घोष है।
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